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“सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया”

वसुधैव कुटुम्बकं एक ऐसी संस्था है जो आज के दौर में गरीबी, भुखमरी जैसी सामाजिक समस्याओ को पूरी तरह से खत्म करने में सक्षम है | गरीब, मजदुर और असहाय वर्ग के लोगो को ध्यान में रखते हुए वसुधैव कुटुम्बकं की शुरुआत की गयी है ताकि उन्हें समाज में प्रतिष्ठा और सम्मान मिल सके जो उनका मौलिक अधिकार है | हम प्राय देखते है कि गरीब और कमजोर लोगो को समाज में बेइज्जत, अपमानित और त्रिश्क्रत किया जाता है, उन्हें घ्रणा की दृष्टि से देखा जाता है, हमारे इसी समाज का हिस्सा होते हुए भी उन्हें हीन दृष्टि से देखा जाता है | वसुधैव कुटुम्बकं का उद्देश्य उन्हें अपमानित और त्रिस्क्रत जीवन से मुक्ति दिलाकर समाज में प्रतिष्ठा और सम्मान दिलाना है |

      औरते, जो बराबर की हक़दार होते हुए भी प्रताड़ना झेलती है क्यों की वो आत्मनिर्भर नही होती है | अधिकांश महिलाये आय का कोई जरिया नही होने के कारण अपमान और प्रताड़ना झेल रही है | वसुधैव कुटुम्बकं का उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और समाज में सम्मान दिलाना है | आज गरीबी के कारण गरीब और मजदुर वर्ग के लोगो के बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते है जिस कारण उन्हें भी जीवनयापन के लिए अंततः मजदूरी ही करनी पडती है | इस तरह एक मजदूर का बेटा मजदूर ही बन कर रह जाता है | अगर हम अभावों का जीवन जी रहे, गरीबी में पल रहे मेधावी बच्चे को थोडा सा सहयोग और संबल दे सके तो एक गरीब का बेटा भी उच्च पद पर पहुँच सकता है इसमें कोई दो राय नही है |

      इसी प्रकार आज के समय में किसानों की स्थिति बड़ी विकट है, खेती आज लाभ का व्यवसाय नही रह गया है | अधिकांश छोटे किसान कर्ज में दबे हुए है किसानो की बदौलत कम्पनियां दिन प्रतिदिन अमीर हो रही है, कोई दूसरा आय का स्रोत नही होने की वजह से खेती करना आज सिवाय मजबूरी के कुछ नही है |

                सामाजिक क्षेत्र में काम कर रहे काफी भाई बहन आज आर्थिक समस्या का सामना करते है वह सामाजिक सेवा क्षेत्र में नाम कमाना चाहते है लेकिन पैसे नही है | धनाभाव की वजह से काफी अच्छे सामजिक कार्य गर्त में चले जाते है जो अगर चल रहे होते तो जन जन को उनका लाभ सदियों तक मिलता रहता | सामाजिक सेवा की बात हम करें तो इसे ऐसे समझे की आज आप पर्यावरण को लेकर चिंतित है और आप 100 पेड़ लगाना चाहते है लेकिन आपके पास सिर्फ 10 पेड़ लगाने के लिए जेब में पैसे है तो आप 100 पेड़ नही लगा पाएंगे | अगर आप 100 पेड़ लगाते तो उसका लाभ ज्यादा लोग उठाते | (सामाजिक क्षेत्र की सेवा को किसी धर्म विशेष से न जोड़ा जाये जिसके मन में मानवता और सेवा भाव है वह चाहे किसी भी जाति धर्म देश का हो सेवा ही करेगा) | इसी प्रकार आप 100 गरीब बच्चो को शिक्षा देना चाहते है और आपके पास पर्याप्त पैसा नही है तो आप समाज सेवा का यह कार्य नही कर पायेंगे | इन्ही सब बातो को ध्यान में रखते हुए वसुधैव कुटुम्बकं से जुड़े और अपने सम्पर्को के साथ मिल कर आगे बढे |

      कई लोग शार्टकट के चक्कर में गलत रास्ता चुन लेते है, नतीजा समाज में अपराध और बुराई का बोलबाला हो जाता है | अधिकांश गलत कार्यों का कारण मजबूरी और गलत शौक ही रहता है | सभी आर्थिक रूप से सम्पन्न होंगे तो समाज में सभी को सम्मान और इज्जत मिलेगी | चोरी, लूट, डैकेती  जैसे अपराध बंद होंगे | किसी गरीब की बेटी दहेज़ के लिए प्रताड़ित नही होगी | औरते खुद अपनी जिन्दगी बेहतर जी सकेंगी और विद्यार्थी अपना खर्च स्वयं उठा सकेंगे | इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए वसुधैव कुटुम्बकं का सञ्चालन प्रारम्भ किया गया | वसुधैव कुटुम्बकं से जुड़कर बेहतर जीवन की और कदम बढाइये | हमारा प्रथम और अंतिम उद्देश्य है कि सभी सुखी हो, सभी निरोगी हो और सभी प्रेम और भाईचारे से अपना जीवनयापन करे |

इस प्रकार साथ आइये, आगे बढिए और “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया” को चरितार्थ कीजिये