Few Words

हर व्यक्ति स्वयं से वादा करे ईमानदारी, मेहनत और लगन से काम करने का
प्रिय मित्रों,
      हम सामाजिक परिवेश में एक दुसरे से व्यवहार करते है, बातचीत करते है, साथ रहते है और एक दुसरे की मदद भी करते है इसी का नाम समाज है और इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हम इस समाज में, देश में एक दुसरे से कमाते भी है जिससे हमारी आजीविका चलती है | हमारे स्वयं का एवं परिवार का पालन पोषण होता है | हम दिन रात मेहनत करके, अपने सपनों को घोंट कर, मार कर अपने परिवार का पालन पोषण करते है, उसके बावजूद यह सब करना अत्यंत कठिन और दुष्कर है क्यों कि एक आम इन्सान कमाने के लिए कितना ही भागदौड कर ले, महंगाई रुपी सुरसा निगलने के लिए अपना आकार बढाती ही जाती है जिसके आगे एक सामान्य इन्सान के प्रयास बौने प्रतीत होते है | कुछ भाई बहन इस सुरसा से हार जाते है, आत्महत्या तक का कदम उठा लेते है तो कुछ गलत राह पर चल पड़ते है |
      क्या कोई ऐसा रास्ता है जिससे हम सभी सुखी हो, क्या कोई ऐसा रास्ता है जिससे कोई गरीब न रहे, सबकी जेब में पैसा रहे | क्या कोई ऐसा रास्ता है जिससे सभी समानता के स्तर पर आ सकें | क्या कोई ऐसा रास्ता है जिससे सभी की लाइफ स्टाइल, रहन सहन पूर्णतया बदल जाये और सभी समृद्ध बन जाएं | क्या कोई ऐसा रास्ता है जिससे कोई आर्थिक तंगी से परेशां होकर आत्महत्या न करे क्या कोई ऐसा रास्ता है जिससे पैसे की वजह से किसी की सामाजिक बेजती न हो | क्या कोई ऐसा रास्ता है जिससे आर्थिक अभाव में किसी का इलाज न रुके | क्या कोई ऐसा रास्ता है जिससे पैसे की कमी से किसी का घर-जमीन न बिके | क्या कोई ऐसा रास्ता है जिससे गरीबी में दहेज न देने की वजह से किसी गरीब कन्या की शादी न रुके |
 
ये सभी सवाल अगर आपसे पूछे जाएं तो आपका जवाब होगा – ऐसा होना असम्भव है |
 
परन्तु हां, ऐसा सम्भव है अगर हम सभी स्वयं के प्रति ईमानदार रह कर वसुधैव कुटुम्बकं से जुड़ें और सिर्फ 6 महीने पूरी लगन और मेहनत से कार्य करें तो |
 
हमारा उद्देश्य है कि हम सभी में अमीर गरीब का कोई भेद न होकर समानता के भाव से उस परमपिता परमात्मा की बनाई इस सृष्टि के नियमो का पालन करते हुए अपना जीवनयापन करें | आज की पूंजी वादी अर्थव्यवस्था और जीवनशैली में अमीर और अमीर हो रहे है तथा गरीब और गरीब होते जा रहे है | यहाँ तक कि महंगाई की वजह से सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी दर पर जीवनयापन तक असंभव हो रहा है और जनता के भूखे मरने की नोबत आ रही है, बच्चों की स्कूल फीस भरना असम्भव हो रहा है, तो ऐसे में एक सामान्य व्यक्ति द्वारा लक्जरी लाइफ स्टाइल का सोचना दिन में तारे देखने जैसा है जो कभी सम्भव ही नही है |
      इसके अलावा अगर हम गरीब वर्ग को छोडकर मध्यम वर्ग की बात करें तो आज के समय में मध्यम वर्ग हालातों से सबसे ज्यादा परेशान है बड़े काम सम्भव नही रिस्क ज्यादा होता और छोटे काम कर नही सकता शर्म और लोकलाज की वजह से ऐसे में करे तो क्या करे | जो वेतनभोगी कर्मचारी है उनकी आमदनी फिक्स है, महीने की 20 से 25 के बीच में जेब खाली हो जाती है | उस स्थिति में व्यक्ति बड़ा असहाय महसूस करता है कि इतना पढ़ लिखकर मेहनत करके भी आज ऐसे हालातों का सामना करना पड़ रहा है | सबसे ज्यादा हालत उन बेरोजगारों की ख़राब है जो अच्छी नौकरी पाने की ख्वाहिश में काफी पढ़ लिख गये और अब रोजगार नही है, कम पैसे की नौकरी से न काम चलता है और न ही वो स्तर रहता है फिर इतना पढने का क्या लाभ जब मजदूरी ही करनी है तो , ऐसा विचार करते करते हमारे युवा कुंठित हो रहे है और मानसिक तनाव का शिकार बनकर नशे और अपराध की और जा रहे है | ऐसे में व्यक्ति रोजगार या आय के लिए अन्य विकल्पों की तलाश करता है | आज बहुत सी मार्केटिंग कम्पनियां, चिटफण्ड कम्पनियां, MLM कंपनियां जनता की इस कमजोरी का फायदा उठाकर उन्हें ज्यादा कमा कर जल्दी अमीर बनने का सपना दिखा कर अपनी जेब भरते है और निकल लेते है | यह सब इसलिए होता है क्यों की उनकी परियोजनाएं दूरगामी नही होती और अंत में नये जुड़ रहे भाई बहनों को देने के लिए उनके पास कुछ नही होता और ऐसे में अंतिम व्यक्ति ठगे जाते है |
      हमारा उद्देश्य है कि हम दूरगामी प्रोडक्ट / सर्विस परियोजनाएं उपलब्ध करवा कर कंपनी के सभी डिस्ट्रीब्यूटर प्लान को गतिशील बनाये रखे और जिन उद्देश्यों के लिए इस कम्पनी की शुरुआत की गयी है वह अंत तक बने रह सके | जिससे सम्पूर्ण देशवासी आर्थिक समानता प्राप्त कर अपने अपने कार्यों में बिना किसी चिंता के संलग्न हो सकें | साथ ही देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता से निभा सकें | कृषक खेती करें, व्यापारी व्यापार करें, ऐसे ही सभी भाई बहन अपने कार्यो में निश्चिंतता पूर्वक लगे रह सके | हमारा देश केवल “वसुधैव कुटुम्बकं” की राह पर चल कर ही पुनः विश्वगुरु और सोने की चिड़िया बन सकता है | भारत देश सोने की चिड़िया तभी बन सकेगा जब सभी आर्थिक रूप से संपन्न होंगे अन्यथा भुखमरी और गरीबी के साथ विश्वगुरु और सोने की चिडिया बनाने की सोचना नितांत मुर्खता है |
      हमारा उद्देश्य है कि हमारे देश में अमीर गरीब का भेद समाप्त होकर आर्थिक समानता आये, किसी की जमीन पैसो के अभाव में न गिरवी रखी जाये और न बेचीं जाये क्यों की जमीन गिरवी रखने या बेचने का दर्द बहुत गहरा होता है जो सात पीढियों तक अफ़सोस का कारण बनता है | हमारा उद्देश्य है कि पैसे के अभाव में कोई इलाज से वंचित न रहे, पैसे की तंगी में कोई अपनी इच्छाओं का गला न घोंटे | अपने सपनों को साकार करने का हक सभी को है | लेकिन बिना इस वातावरण को बदले यह सब असम्भव है और इस असम्भव को संभव हम सभी सिर्फ मिलकर ही कर सकते है | स्थितियों में बदलाव तभी संभव है जब आपकी इच्छाशक्ति दृढ है तो ही | अगर व्यक्ति किसी अन्य से नही स्वयं से यह वादा करे की मुझे बदलना है, मुझे मुझे अपने कार्यो से स्वयं की जिन्दगी में परिवर्तन लाना है, मुझे अपने कार्यो से समाज और देश में परिवर्तन लाना है तो निश्चित रूप से बदलाव सम्भव है पर शर्त यह है कि वादे सर वादे ही न रहे | वादे के अनुरूप हम कार्य निति बनाये और उस पर चले, अपने कार्यो, परिणामो का समय समय पर अवलोकन करें और जहाँ कमी लगे वहा सुधर कर पुनः दुगुने जोश के साथ अधिक उर्जा के साथ खुद को लक्ष्य की और आगे बढ़ाएं |
      तो आइये, आज स्वयं से वादा करे, स्वयं के प्रति ईमानदार रहने का, स्वयं से वादा करे, अपने कार्यो के प्रति ईमानदार रहने का, स्वयं से वादा करे, देश और समाज के प्रति ईमानदार रहने का, स्वयं से वादा करे, जब तक लक्ष्य न मिले तब तक न रुकने का न हारने का | तो आइये और वसुधैव कुटुम्बकं से से जुड़कर बदलाव लाने की शुरुआत स्वयं से करें |
 
जय हिन्द जय भारत